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इंडियन डायबिटीज़ रिस्क स्कोर

भारतीय वयस्कों के लिए बने चार सवाल, जिनसे अंदाज़ा मिलता है कि कहीं आपको टाइप 2 डायबिटीज़ तो नहीं, जिसका आपको अभी पता न हो। सारा हिसाब आपके डिवाइस पर ही होता है; आप जो भी भरते हैं, वह न कहीं भेजा जाता है, न कहीं सेव होता है।

1. आपकी उम्र
2. कमर

सबसे निचली पसली और कूल्हे की हड्डी के ऊपरी सिरे के ठीक बीच में, साँस बाहर छोड़ने के बाद। cm और इंच के बीच बदलने के लिए इकाई पर टैप करें।

3. शारीरिक गतिविधि
4. माता-पिता में डायबिटीज़

उन वयस्कों के लिए, जिन्हें कभी नहीं बताया गया कि उन्हें डायबिटीज़ है। गर्भावस्था में लागू नहीं।

आपका स्कोर
—100 में से

चारों सवालों के जवाब दें।

स्कोर कैसे निकाला जाता है?

सवालजवाबअंक
उम्र35 से कम0
35 – 4920
50 या उससे ज़्यादा30
कमरमहिला 80 cm से कम, पुरुष 90 cm से कम0
महिला 80 – 89 cm, पुरुष 90 – 99 cm10
महिला 90 cm या उससे ज़्यादा, पुरुष 100 cm या उससे ज़्यादा20
शारीरिक गतिविधिज़ोरदार: नियमित ज़ोरदार कसरत, या घर पर या काम पर मेहनत वाला (शारीरिक) काम0
मध्यम: नियमित मध्यम कसरत, या घर पर या काम पर मध्यम गतिविधि10
हल्की: नियमित हल्की कसरत, या घर पर या काम पर हल्की गतिविधि20
कोई नहीं: कोई कसरत नहीं, घर और काम पर ज़्यादातर बैठे-बैठे30
माता-पिता में डायबिटीज़किसी को नहीं0
एक को10
दोनों को20

कुल 30 से कम: कम जोखिम। 30 से 50: मध्यम। 60 या उससे ज़्यादा: उच्च जोखिम।

यह कितना भरोसेमंद है?

जिस अध्ययन से यह स्कोर बना (चेन्नई के 2,350 वयस्क), उसमें 60 या उससे ज़्यादा स्कोर ने उन 72.5% लोगों को पकड़ा, जिन्हें डायबिटीज़ थी पर पता नहीं था (सेंसिटिविटी), और जिन्हें डायबिटीज़ नहीं थी, उनमें से 60.1% को सही-सही अलग किया (स्पेसिफ़िसिटी)। 60 या उससे ज़्यादा स्कोर वालों में लगभग 6 में से 1 को सच में डायबिटीज़ निकली; 60 से कम वालों में लगभग 100 में से 95 को नहीं थी। यह एक सस्ती पहली छलनी है, जो बताती है कि किसे खून की जाँच करवानी चाहिए; यह अपने-आप में कोई जाँच नहीं है। बाद में मंगलौर और लखनऊ में हुए अध्ययनों में भी यह वहाँ के लोगों पर ठीक काम करता पाया गया।

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आम सवाल

इंडियन डायबिटीज़ रिस्क स्कोर क्या है?

चार सवालों वाला यह स्कोर मद्रास डायबिटीज़ रिसर्च फ़ाउंडेशन (मोहन और साथी, 2005) ने चेन्नई अर्बन रूरल एपिडेमियोलॉजी स्टडी के आधार पर बनाया है। इसमें उम्र, कमर, शारीरिक गतिविधि और माता-पिता की डायबिटीज़ के अंक जोड़े जाते हैं (कुल 100 में से)। मकसद है उन वयस्कों को ढूँढना, जिन्हें शायद टाइप 2 डायबिटीज़ हो और उन्हें पता न हो।

IDRS में कितना स्कोर ज़्यादा माना जाता है?

60 या उससे ज़्यादा का मतलब उच्च जोखिम, 30 से 50 का मध्यम, और 30 से नीचे का कम जोखिम। मूल अध्ययन में 60 या उससे ज़्यादा स्कोर से ऐसे लगभग 10 में से 7 लोग पकड़ में आए, जिन्हें डायबिटीज़ थी पर पता नहीं था।

क्या कम स्कोर का मतलब है कि मुझे डायबिटीज़ नहीं है?

नहीं। स्कोर सिर्फ़ जोखिम का अंदाज़ा देता है; डायबिटीज़ वाले कुछ लोग इससे छूट जाते हैं। पक्का पता सिर्फ़ खून की जाँच (फ़ास्टिंग ग्लूकोज़, HbA1c या ग्लूकोज़ टॉलरेंस टेस्ट) से चलता है। अगर आपको बहुत प्यास लगना, बहुत पेशाब आना या वज़न घटने जैसे लक्षण हैं, तो स्कोर चाहे जो हो, जाँच करवाएँ।

स्कोर के कौन-से हिस्से मैं बदल सकता हूँ?

कमर और शारीरिक गतिविधि: दोनों मिलाकर 100 में से 50 अंक तक। उम्र और परिवार में डायबिटीज़, ये बदले नहीं जा सकते।

स्रोत3
  1. Mohan V, Deepa R, Deepa M, Somannavar S, Datta M. A simplified Indian Diabetes Risk Score for screening for undiagnosed diabetic subjects. J Assoc Physicians India 2005;53:759-63.
  2. Adhikari P, Pathak R, Kotian S. Validation of the MDRF-Indian Diabetes Risk Score (IDRS) in another south Indian population through the Boloor Diabetes Study. J Assoc Physicians India 2010;58:434-6.
  3. Khan MM, et al. Validity of Indian Diabetes Risk Score and its association with body mass index and glycosylated hemoglobin for screening of diabetes in and around areas of Lucknow. J Family Med Prim Care 2017;6:366-73.

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